
सागर 09 मार्च 2026
निजी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों और यूनिफॉर्म की उपलब्धता को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने सभी पुस्तक विक्रेताओं और संबंधित पक्षों से चर्चा की। बैठक का मुख्य ध्येय अभिभावकों पर आर्थिक भार कम करना और छात्रों को सुगमता से सामग्री उपलब्ध कराना रहा।
अपर कलेक्टर रावत ने विक्रेताओं से आग्रह किया कि वे आयोजित होने वाले पुस्तक मेले में अपने स्टॉल अनिवार्य रूप से लगाएं। प्रशासन की मंशा है कि अभिभावकों को अलग-अलग दुकानों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए कुछ प्रमुख सुझाव साझा किए गए। जिसमें विक्रेता यह सुनिश्चित करें कि मेले में ही पुस्तकों के पूरे सेट उपलब्ध हों, ताकि अभिभावकों को शेष सामग्री के लिए दुकानों पर न भटकना पड़े। मेला अवधि के दौरान सभी अधिकृत विक्रेता एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेंगे, जिससे चयन और क्रय में आसानी होगी।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर
बैठक में एनसीईआरटी और प्रामाणिक पुस्तकों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशासन ने विक्रेताओं से अपेक्षा की है कि, अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए केवल उच्च गुणवत्ता वाली और सही पुस्तकें ही विक्रय की जाएं। किसी भी प्रकार की डुप्लीकेट या नकली सामग्री के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने हेतु जागरूकता बढ़ाई जाएगी। पर्यावरण और आर्थिक बचत को देखते हुए सुझाव दिया गया कि अगले 3-4 वर्षों तक पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव न किए जाएं, ताकि वरिष्ठ छात्रों की पुस्तकें कनिष्ठ छात्र पुन: उपयोग कर सकें। यह स्पष्ट किया गया कि अभिभावकों को पुस्तकों के साथ स्टेशनरी या कॉपियां लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। वे अपनी पसंद और आवश्यकतानुसार सामग्री ल सकेंगे।













